1उस सुबह आंगन बिलकुल शांत था। ताजगी भरी बर्फ पुराने पत्थर की टाइलों पर बिछी थी। अन्ना साइड डोर से बाहर आई और उसने पहली बार गहरी बूटों की छाप छोड़ी।
2एल्सा उसके पीछे आई, उसकी हल्की चोटी में सर्दी की रोशनी चमक रही थी। उसने खाली आंगन को देखा और मुस्कुरा उठी। वह जानती थी कि उसे क्या उगाना है।
3एल्सा ने अपने हाथ ऊपर उठाए। दीवार के पास, पुरानी पत्थर की बेंच के किनारे और जमी हुई मेहराब के पास सफेद बर्फीले फूल उग आए।
4अन्ना ने अपने जूतों से फूलों के बीच में सुंदर घुमावदार रास्ते बनाए। "बगिया में चलने के लिए जगह चाहिए," उसने कहा और एल्सा हँस पड़ी।
5तभी सूरज की किरणें पहली क्यारी तक पहुंच गईं। बर्फीले फूलों की पंखुड़ियाँ नरम हो गईं और झुकने लगीं। "ये तो पिघल रहे हैं!" अन्ना ने कहा।
6दोनों बहनें ठंडी उत्तर दिशा की दीवार की ओर देखने लगीं। "हम इन्हें वहाँ ले चलते हैं," एल्सा ने शांत होकर कहा।
7एल्सा ने हर फूल को सावधानी से छाया में उठाकर फिर से सजाया, जबकि अन्ना ने एक बार फिर रास्ते बनाए। काम करते हुए उनकी साँसें छोटी-छोटी बादल जैसी दिख रही थीं।
8"एक चीज़ और," एल्सा ने कहा। उसने दोनों हाथ ऊपर किए और एक चमकता हुआ बर्फीला मेहराब सबसे चौड़े रास्ते पर उग आया।
9अन्ना मेहराब के नीचे से चली और ऊपर देखा। उसके चारों ओर बर्फ की रोशनी झिलमिला रही थी, जब वह मुस्कुराकर चमकती फ्रेम के बीच से एल्सा की ओर मुड़ी।
10वह छोटी बगिया छाया में झिलमिला रही थी, दो जोड़ी हाथों से बनी हुई। सर्द सुबह की शांति में अन्ना ने एल्सा का हाथ थाम लिया।
