1गाँव एक चौड़ी, चौकोर मैदान के किनारे बसा था, जहाँ घास हरे वर्गों में उगती थी और पेड़ कतारों में सीधे खड़े थे। Steve और Alex वहीं रहते थे, उस जगह जिसे उन्होंने पत्थर के एक-एक ब्लॉक से बनाया था।
2चौकोर पोखर के किनारे एक कंकरीट की राह ऐसे ही अधूरी पड़ी थी। पास ही खुरदरे, भूरे ब्लॉक तरतीब से कतार में खड़े थे—काम आ जाने को तैयार।
3Alex Steve के पास खड़ी थी, उसकी चौकोर हरी आँखें रास्ते के अंधेरे में जाती ओर देख रही थीं। "जब चाँद निकलेगा, शायद उसके उजाले में ये पत्थर चमकें—अगर हम रास्ते को ऐसे मोड़ दें," उसने सोचा।
4Steve ने अपना ब्लॉक जैसा सिर धीरे से हिलाया। "चलो कोशिश करते हैं।"
5Alex थोड़ा पीछे हटी और एक हाथ से राह का घेरा बनाया। "थोड़ा और इस ओर," उसने कहा। Steve ने ब्लॉक को सरकाया। "बस, हो गया।"
6एक के बाद एक, वे दोनों तालाब के चारों ओर राह में ब्लॉकों को सजाते गए। ब्लॉक की क्लिक क्लिक की आवाज आई, और इंतज़ार करता ढेर छोटा होने लगा।
7फिर, पूर्णिमा का चाँद छाते पेड़ों के ऊपर सफेद और गोल निकल आया।
8चाँदनी नई कंकरीट की राह पर बरसने लगी। हर भूरे पत्थर पर चाँदी का सा उजास उभरा, और मोड़ी गई राह पोखर की काली सतह के पास चमकने लगी।
9Alex ने एक पत्थर पर पैर रखा, फिर दूसरे पर। राह ने उसे धीरे-धीरे पोखर के चारों ओर घुमा दिया, हर कदम पर बस उतनी रौशनी थी जितनी चाहिए थी। Steve चुपचाप पीछे-पीछे चला।
10राह के अंतिम सिरे पर वे दोनों मुड़कर गाँव, पोखर और उस चाँदनी से जगमगाती कंकरीट की पट्टी को देखते हैं, जिसे उन्होंने साथ मिलकर सजाया था। ब्लॉकों के ढेर की जगह अब कुछ नया था।
