1सुबह का आसमान चमकीला और नीला था जब चेस और स्काई साथ-साथ घास से भरी पहाड़ी की पगडंडी पर दौड़ते चले गए. सामने की ढलान चौड़ी, हरी और हिलती घास से भरी थी.
2हु—ऊ—ऊ—ऊ! एक तेज़ हवा के झोंके ने सूखे पत्तों को उठा लिया और उन्हें उन पंजों के निशानों के ऊपर घुमा दिया, जो पिल्लों ने अभी बनाए थे.
3"हमारा रास्ता छुप गया!" चेस ने भौंक कर कहा. उसने तीन खास चिन्ह याद रखे जो उड़ नहीं सकते थे: एक काई से ढकी बड़ी चट्टान, एक झुकी हुई टहनियाँ, और सफेद जंगली फूल.
4हु—ऊ—ऊ—ऊ! इस बार हवा और ज़ोर से चली और पूरी पहाड़ी पर घास को हरा-भरा लहरदार बना दिया.
5स्काई उछलकर पहाड़ी के किनारे पहुँच गई. ऊपर से उसे हिलती घासों के बीच एक शांत सिल्वर धार दिखी. "देखो, सामने देखना है!" उसने खुश होकर आवाज़ लगाई.
6दोनों साथ आगे बढ़ते गए. "चट्टान — चेक! टहनी — चेक! फूल — चेक!" चेस ने गिनवाया, जब स्काई चलती घास को देख रही थी.
7तीसरे झोंके ने उन्हें घूमते सुनहरे पत्तों से घेर लिया. चेस ने अपनी नाक नीचे की. स्काई ने अपने कान सटा लिए. उनके चारों पंजे मजबूती से चलते रहे.
8आख़िरकार, वे उस शांत जगह पहुंचे जहाँ घास छोटी थी और आसपास हवा चल रही थी. नीचे घाटी सूरज में चमक रही थी.
9घर लौटने का समय आया, तो चेस ने चिन्ह उल्टे क्रम में गिनवाए: "जंगली फूल! टहनी! चट्टान!"
10स्काई पहाड़ी के किनारे-किनारे चली और घास के हर मोड़ को पढ़ती गई. पंजों के निशान अभी भी छुपे थे, पर इन दोनों को अब उनकी ज़रूरत नहीं थी.
11जैसे ही बादल गुलाबी होने लगे, वे नीचे पहुँच गए. चेस ने अपनी टोपी से एक पत्ता हिलाकर गिराया, और स्काई ने छोटी सी छींक मारी.
12पीछे, पहाड़ी शांत और ऊँची खड़ी थी. उसकी लंबी घास आखिरी नरम हवा में धीरे-धीरे सरसराई. हु—ऊ—ऊ...
