1चाँदी की ऊँची घास वाली एक घाटी में लूना नाम की एक छोटी यूनिकॉर्न रहती थी। लूना को दिन बहुत पसंद था, जब सब कुछ उजला और साफ़ दिखता था। लेकिन जब रात आती, तो अँधेरा उसके पेट में गुदगुदी-सी करने लगता।
2"मुझे अँधेरा पसंद नहीं," लूना ने अपनी माँ से कहा। "मुझे कुछ भी दिखाई नहीं देता।" माँ ने प्यार से उसका माथा सहलाया। "चलो थोड़ा टहलते हैं, मैं तुम्हें अँधेरे का एक राज़ दिखाती हूँ।"
3वे गहरे नीले आसमान के नीचे निकल पड़े। पहले लूना ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। पर माँ ने धीरे से कहा, "आँखें धीरे-धीरे खोलो। अँधेरा खाली नहीं होता — इसमें बहुत-सी शांत चीज़ें रहती हैं।"
4लूना ने आँखें खोलीं। ऊपर आसमान में हज़ारों तारे टिमटिमा रहे थे, जैसे छोटे-छोटे दोस्त हाथ हिलाकर हैलो कह रहे हों। उसने उन्हें उजले दिन में कभी नहीं देखा था।
5"तारे सिर्फ़ अँधेरे में निकलते हैं," माँ ने कहा। "अगर हमेशा उजाला रहता, तो तुम उनसे कभी नहीं मिल पातीं।" लूना तारों को देखती रही और उसे थोड़ी हिम्मत मिली।
6तभी लूना को कुछ और दिखा। उसके अपने सींग की नोक चमक रही थी — एक मुलायम, गर्म रोशनी, जैसे एक छोटा-सा चाँद जो वह जहाँ चाहे साथ ले जा सकती थी।
7"यह रोशनी हमेशा से तुम्हारे अंदर थी," माँ ने कहा। "जब दुनिया शांत और अँधेरी होती है, तभी यह सबसे अच्छे से चमकती है।" लूना ने अपनी कोमल रोशनी से आगे का रास्ता जगमगाया, और अब अँधेरा उसे उतना डरावना नहीं लगा।
8उस रात लूना चाँदी की घास में सिमट कर सो गई। उसने अपने सींग को पास में हल्के से चमकने दिया और ऊपर तारों की टिमटिमाहट देखती रही। अँधेरा डरने की चीज़ नहीं है, उसे समझ आ गया। यही वह जगह है जहाँ शांत, सुंदर चीज़ें रहती हैं। शुभ रात्रि, लूना। शुभ रात्रि।



