1रात के आसमान में ऊपर, बहुत ऊपर, पिप नाम का एक छोटा-सा तारा रहता था। पिप पूरे आसमान का सबसे छोटा तारा था, और उसे यकीन था कि इसका मतलब है कि उसका कोई महत्व ही नहीं।
2"बड़े तारे कितने चमकीले हैं," पिप ने आह भरी। "मेरी जैसी छोटी-सी रोशनी को भला कौन देखेगा?" वह एक बादल के पीछे छिप गया और चाहा कि कोई उसे न देखे।
3एक रात, नीचे बहुत दूर, एक छोटा-सा जहाज़ एक विशाल, अँधेरे समुद्र में चला जा रहा था। नाविक आसमान की ओर देख रहे थे, एक ऐसी रोशनी ढूँढ रहे थे जो उन्हें सुरक्षित घर तक पहुँचा सके।
4बड़े तारे खूब चमक रहे थे, लेकिन वे इतने ऊँचे और इतने दूर थे कि नाविक एक को दूसरे से अलग नहीं पहचान पा रहे थे। वे खोया हुआ और डरा हुआ महसूस करने लगे।
5तभी एक युवा नाविक ने सीधे ऊपर की ओर इशारा किया। "देखो! वह छोटा-सा तारा, बिल्कुल वहाँ — वह हमारे बंदरगाह के ठीक ऊपर है। उसे follow करो!" वह पिप की ओर इशारा कर रही थी।
6पिप को यकीन ही नहीं हुआ। वह अपने बादल के पीछे से बाहर आया और जितनी तेज़ रोशनी वह दे सकता था, दी — सीधे अँधेरे पानी पर, रास्ता दिखाते हुए।
7जहाज़ पिप की छोटी, स्थिर रोशनी के पीछे-पीछे पूरे समुद्र को पार करते हुए सुरक्षित बंदरगाह में पहुँच गया। नाविकों ने खुशी से चिल्लाया और पिप की ओर हाथ हिलाए।
8"मैं बहुत छोटा हूँ," पिप ने धीरे से कहा, "लेकिन मेरी रोशनी ही वह रोशनी थी जिसकी उन्हें ज़रूरत थी।" उस रात के बाद से पिप ने कभी बड़ा होने की इच्छा नहीं की। वह जान गया था — सबसे छोटी रोशनी भी किसी को रास्ता दिखा सकती है। शुभ रात्रि, पिप। शुभ रात्रि।



