1टावी ट्राइसिरेटॉप्स ग्रीनरिज हिल की चोटी पर खड़ी थी, उसकी तीन चमकदार सींग बादलों की ओर गर्व से इशारा कर रही थी। वह सुबह भर अभ्यास कर रही थी। आज, तावी ने तय किया, वह अपनी सबसे बड़ी, सबसे बहादुर गर्जना खोजेगी।
2"ग्ऱ्र्र्रर्रर्रआआआह!" तावी ने जोर से दहाड़ लगाई, और हर फर्न की पत्ती थरथरा उठी। पेड़ों की ऊँचाई से एक झुंड प्टेरोडैक्टिल उड़े और तेज आवाज़ में चिल्लाते हुए दूर चले गए। तावी खुश हुई। उसे लगता था – जोर से मतलब बहादुर। वह फर्नवेल घाटी में जा पहुँची, जहाँ लंबे सायकैड के पेड़ ठंडी, हरी कतारों में खड़े थे। "ग्ऱ्र्र्रर्रर्रआआआह!" उसने फिर से और भी जोर से दहाड़ा। ज़मीन हल्के-हल्के काँप उठी। लंबे गले वाले ब्रेम्बल ब्रैकियोसॉरस ने सिर उठाया और उनींदेपन में पलकें झपकाईं। "अरे," ब्रेम्बल बोले, "क्या यह गरज थी?" तावी अपने फ्रिल को फुलाकर गर्व महसूस करने लगी। फिर उसको एक और आवाज़ सुनाई दी – बिल्कुल पतली, हल्की ध्वनि, फर्नों के बीच से आती हुई। पिप। पिप। पिप। बहुत छोटी। बहुत खोई हुई।
3तावी ने ऊँचे पत्तों के बीच से धक्का देकर देखा कि वहाँ एक नन्हा सा बच्चा बैठा है, जो एक नदी के पत्थर जितना छोटा था, और दो जड़ों के बीच की कीचड़ में बैठा था। उसके आँखें चमकीले बीटल के खोल जैसी बड़ी-बड़ी थीं। वह फिर से पिप किया, और धीरे-धीरे इधर-उधर घूम रहा था, जैसे किसी चीज़ की तलाश में हो। "मैं तुम्हारे परिवार को बुलाती हूँ!" तावी ने घोषणा की। उसने अपने फेफड़े हवा से भर लिए और— "ग्ऱ्र्र्रर्रर्रआआआह!" लेकिन बच्चा उल्टा गिर गया और डर से सिहरने लगा, जैसे गीली पत्ती काँपती हो। तावी को बुरा लगा। इससे कोई मदद नहीं मिली।
4उसने फिर से कोशिश की, इस बार और भी जोर से। "ग्ऱ्र्र्रर्रर्रआआआह!" ब्रेम्बल ने अपने विशाल पैरों से अपने कान ढक लिए। एक परिवार एंकायलोसॉरस का बड़बड़ाते हुए वहाँ से निकल गया। बच्चा ने अपनी आँखें कसकर बंद कर ली। घाटी अचानक बहुत शोरगुल वाली और बहुत खाली लगने लगी।
5तावी थककर बच्चे के पास बैठ गई। उसके सींग झुक गए। जोर से बोलना काम नहीं कर रहा था। उसने उस नन्हे जीव की ओर देखा, और सोचा कि उसे सच में क्या चाहिए – न गरज, न हिलती हुई पत्तियां। उसे तो एक ऐसी आवाज़ चाहिए जिसे वह घर तक जा सके। उसने गहरी साँस ली। उसने कुछ नया आज़माया। नरम। स्थिर। बिल्कुल साफ, जैसे कंकरों पर बहती नदी। "इधर... इधर... यहाँ आओ," तावी ने धीमी, स्पष्ट आवाज़ में बार-बार पुकारा।
6पिप। पिप। बच्चा ने अपना सिर उठाया। उसकी आँखें घूमना बंद हो गईं। उसने तावी की आवाज़ की ओर डगमगाते हुए एक क़दम बढ़ाया, फिर और एक क़दम।
7और फिर – सरसराहट – एक बड़ा एंकायलोसॉरस फर्नों के बीच से आता दिखा, सिर नीचे किए, उसी शांत, साफ आवाज़ का पीछा करता हुआ।
8बच्चा ख़ुशी से चूं-चूं करता हुआ आगे दौड़ा और बड़े डायनासोर की चौड़ी, कवचदार बाजू के नीचे छुप गया।
9ब्रेम्बल ने अपनी लंबी गर्दन को नीचे झुकाया, यहाँ तक कि उसकी एक विशाल आंख तावी की नाक के बराबर पहुँच गई। "यह," उसने बड़ी प्रशंसा से कहा, "आज का सबसे बहादुर काम था जो मैंने सुना।"
10तावी ने एक पल के लिए अपने पैरों की ओर देखा। फिर वह ऊपर, ग्रीनरिज हिल की ओर देखने लगी, जहाँ घाटी में फर्न अब भी हल्के-हल्के हिल रहे थे। उसने फिर से गहरी साँस ली, और महसूस किया कि कुछ नया उसके दिल में उतर गया है – न जोर से, न छोटा, बस उसका अपना।



