1दादी जो ने रसोई की मेज़ पर कपड़ों की ढेर सारी रंग-बिरंगी कतरनें फैला दीं। वहाँ चौकोर और तिकोने टुकड़े थे, कोई धारीदार, कोई छींटदार, कुछ फुसफुसाहट जितना नरम और कुछ कागज़ की थैली जैसे खुरदरे। "यह हर एक टुकड़ा," दादी जो ने कहा, "किसी ऐसे स्थान से आया है जिसे हम प्यार करते हैं।"
2अमारा ने नीले-सफेद चैक वाले कपड़े का एक टुकड़ा उठाया। उसमें हल्की सी किसी गर्म और मसालेदार चीज़ की खुशबू थी। "यह चाचा डेसमंड के पुराने ऐप्रन से है," दादी जो ने बताया। "वो हर रविवार जोलोफ चावल बनाते थे। बाहर सीढ़ियों से भी बर्तन की खनखनाहट सुनाई देती थी।" अमारा ने उसे बड़े ध्यान से रखा, जैसे वो अभी भी गर्म हो सकता था।
3अगला टुकड़ा पीला कौर्डरॉय था, एक किनारे से घिसा हुआ और मुलायम। दादी जो ने उसे अपने अंगूठे से सहलाया। "यह तुम्हारी बुआ प्रिया ने भेजा है। यह उनके पढ़ने वाले कुर्सी के तकिए की खोल से है—वही जिसमें वो तुम्हें गोद में बिठाकर तीन, फिर चार, फिर पाँच किताबें पढ़ती थीं, क्योंकि तुम हमेशा कहती थीं, एक और।" अमारा हँसी। वो अब भी ऐसा कहती थी।
4एक गहरे हरे रंग की ऊन की पट्टी थी, जो पहले एक स्कार्फ का हिस्सा थी। दादी जो ने कहा, "पापा क्वेकू इसे पहने हुए थे, जब पहली बार वो तुम्हारी मामा को द्वीप से घर लाए थे। वो कहते थे, उस दिन समुद्री हवा बहुत तेज़ थी।" अमारा ने उसे अपने गाल से लगाया। वह थोड़ा चुभ रहा था, लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ा।
5एक छोटा सा लाल तिकोना टुकड़ा था, जिसमें सफेद रंग के छोटे-छोटे संगीत के नोट छपे थे। दादी जो ने उसे खिड़की की रौशनी में पकड़ा। "यह कज़िन लैला के अपार्टमेंट के परदों से है—वही ऊपर वाला, संगीत स्कूल के ठीक ऊपर। हर शाम, फर्श के नीचे से संगीत की तानें सुनाई देती थीं। लैला कहती थी, मानो किसी गीत के भीतर रह रही हो।"
6अमारा ने उन टुकड़ों को मेज़ पर सजा कर रखना शुरू किया, जैसे कोई ऐसी पहेली बना रही हो जिसके कई सही जवाब हो सकते हैं। वहाँ हाथीदांत रंग की लिनन थी, जिससे दादी जो ने परांठे बेलना सीखा था। वहाँ हल्की ग्रे रंग की फलैनल थी, जो अमारा ने अपने पापा के घर पहनी थी, उन रातों में जब उनका पुराना कमरा तैयार नहीं था और पापा ने उनके लिए सोफे पर घोंसला बनाया था। वहाँ नारंगी सूती कपड़ा था उस सन हैट से, जो पश्चिम में दूर रिश्तेदारों के यहाँ जाते समय दो बार उड़ गया था और दोनों बार सबकी हँसी के बीच पकड़ लिया गया था। हर टुकड़ा छोटा था। कोई भी एक-दूसरे से मेल नहीं खाता था।
7"दादी जो," अमारा ने पूछा, "ये सब इतने अलग हैं। क्या यह अच्छा लगेगा?" दादी जो ने सुई में धागा डाला और अमारा के पास बैठ गईं। "चलो देखते हैं।"
8उन्होंने धीरे-धीरे सिलना शुरू किया। शुरू में दादी जो के हाथ अमारा की उंगलियों को दिशा देते, फिर वह खुद सिलने लगी। नीला-सफेद चौकौर, पीले कौर्डरॉय के साथ जुड़ गया। हरी ऊन लाल परदों के तिकोने से बिलकुल सटकर थी। ग्रे फलैनल, नारंगी सन हैट के कपड़े के पास चली गई, और हाथीदांत लिनन ने सबको बीचों-बीच थाम रखा था।
9जब अमारा ने तैयार किया हुआ टुकड़ा उठाया—यह तो बस पहला था, आगे वे और भी जोड़ने वाले थे—तो उसने एक साथ चाचा डेसमंड की रसोई और बुआ प्रिया की पढ़ने की कुर्सी देख ली। उसने फेरी, संगीत, सोफे का घोंसला और उड़ता हैट सब एक साथ देखा, बिना उनमें से किसी को चुनना पड़े। "ये बहुत बड़ा है," उसने धीरे से कहा, जबकि वह टुकड़ा तकिए के कवर जितना ही था।
10"यह और बड़ा होता जाएगा," दादी जो ने कहा। बाहर देर दोपहर की धूप सोने जैसी खिड़की से अंदर आई, और कहीं नीचे गली में किसी ने ज़ोर से दरवाज़ा खोला, किसी का नाम पुकारा, और वह आवाज़ कुछ पल के लिए ऐसे लगी, जैसे हर घर की पुकार एक साथ हो।



